Wednesday, November 2, 2011

BHAGVATI DHOOMAVATI SADHNA - CHARPAT NATH PRANEET

धूमावती एक एसी महाविद्या है जिनके बारे मे साहित्य अत्यधिक कम मात्र मे मिलता है. इस महाविद्या के साधक भी बहोत कम मिलते है. मूल रूप से इनकी साधना शत्रु स्तम्भन और नाशन के लिए की जाती है. लेकिन इस महाविद्या से सबंधित कई ऐसे प्रयोग है जिनके बारे मे व्यक्ति कभी सोच भी नहीं सकता. चरपटभंजन नाम धूमावती के उच्चकोटि के साधको के मध्य प्रचलित रहा है, चरपट भंजन को ही चरपटनाथ या चरपटीनाथ कहा गया है. चरपटनाथ ने अपने जीवन काल मे धूमावती सबंधित साधनाओ का प्रचुर अभ्यास किया था और मांत्रिक धूमावती को सिद्ध करने वाले गिने चुने व्यक्ति मे इनकी गणना होती है, वे कालजयी रहे है और आज भी वे सदेह है. उनके बारे मे ये प्रचलित है की वह किसी भी तत्व मे अपने आप को बदल सकते है चाहे वह स्थूल हो या सूक्ष्म, जैसे मनुष्य पशु पक्षी पानी अग्नि या कुछ भी. ७५०-८०० साल पहले धूमावती साधना के सबंध मे फैली भ्रान्ति को दूर करने के लिए इस महान धूमावती साधक ने कई ग्रंथो की रचना की जिसमे धूमावतीरहस्य, धूमावतीसपर्या, धूमावती पूजा पध्धति जैसे अत्यधिक रोचक ग्रंथ सामिल है. कई गुप्त तांत्रिक मठो मे आज भी यह ग्रन्थ सुरक्षित है. लेकिन यह साधना पद्धतिया लुप्त हो गयी और जन सामान्य के मध्य कभी नहीं आई. धूमावती अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी प्राप्ति से लेके वैभव ऐश्वर्य तथा जीवन के पूर्ण भोग प्राप्त करने के लिए भी धूमावती साधना के कई विधानों का उन्होंने प्रचार किया था. लेकिन ये साधनाओ को गुप्त रखने की पीछे का मूल चिंतन सायद तब की परिस्थिति हो या कुछ और लेकिन इससे जन सामान्य के मध्य साधको का हमेशा ही नुक्सान रहा है. चरपटभंजन ने जो कई गुप्त पध्धातियो का विकास किया था उनमे से एक साधना एसी भी थि जिसको करने से व्यक्ति अपने सामने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे मे कुछ भी जान लेता है. जैसे की चरित्र कैसा है, इस व्यक्ति की प्रकृति क्या है, इसके दिमाग मे इस वक्त कौनसे विचार चल रहे होंगे? इस प्रकार की साधना अत्यधिक दुस्कर है क्यों जीवन के रोज ब रोज के कार्य मे ऐसी साधनाओ से कितना और क्या विकास हो सकता है कैसे फायदा हो सकता है ये तो व्यक्ति खुद ही समज सकता है. मानसिक शक्तियो के विकास की अत्यधिक दुर्लभ साधनाओ मे यह साधना अपना एक विशेष स्थान लिए हुए है. चरपटनाथ द्वारा प्रणित धूमावती प्रयोग आप सब के मध्य रख रहा हू.


इस साधना को करने से पूर्व साधक अपने स्थान का चुनाव करे. साधक के साधना स्थल पर और आसान पर साधक की जब तक साधना चले कोई और व्यक्ति न बैठे. इस साधना मे साधक को ११ माला मंत्र जाप एक महीने (३० दिन) तक करना है. माला काले हकीक की रहे. वस्त्र काले रहे. समय रात्रि काल मे ११ बजे के बाद का हो. धूमावती का यन्त्र चित्र अपने सामने स्थापित करे. तेल का दीपक साधना समय मे जलते रहना चाहिए.


यन्त्र चित्र का पूजन कर के विनियोग करे

विनियोग: अस्य श्री चरपटभंजन प्रणित धूमावती प्रयोगस्य पूर्ण विनियोग अभीष्ट सिद्धियर्थे करिष्यमे पूर्ण सिद्धियर्थे विनियोग नमः

इसके बाद निम्न मंत्र का ११ माला जाप करे

ओम धूमावती करे न काम, तो अन्न हराम, जीवन तारो सुख संवारो, पुरती मम इच्छा, ऋणी दास तमारो ओम छू




मंत्र जाप के बाद साधक धूमावती देवी को ही मंत्र जाप समर्पित कर दे.
ये अत्यधिक दुर्लभ विधान सम्प्पन करने के बाद व्यक्ति यु कहा जाए की अजेय बन जाता है तो भी अतिशियोक्ति नहीं होगी.
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Dhoomavati is one of such mahavidhya about which least literature could be obtained. The sadhak of this mahavidya is also least. Basically her sadhana is done to prevent from enemy or to finish them. But in relation to this mahavidya there are so many such prayoga which are un-imaginable. The name ‘Charpat Bhanjan” has remained famous among highly accomplished sadhak of dhoomavati, charpat bhanjan have also been named charpat nath or charpatinath. Charapat nath have studied deeply majority sadhanas of the dhumavati in his life and among few, he holds a place who accomplished mantrik dhoomavati. He has remained deathless and he is in his actual body today even. It is famous about him that he was able to transform himself in any tangible or intangible element like human, animal, water, fire or anything else. Before 750-800 years this great sadhak of dhoomavati created scriptures to remove misunderstandings related to dhoomavati including few fantastic works like dhoomavatirahashya, dhoomavatisaparya, dhoomavatipoojapadhhati. In many secret tantric places these scriptures are safe currently even but the ritual processes have gone extinct and did not come in front of general people. Though being Alakshmi there were so many processes which were made famous by him to have wealth, to generate prosperity and complete house-holding happiness. But to make these processes secret could be circumstances of that time or may be anything else but it have always been a big loss for material sadhaka. The sadhanas developed by charpat bhanjan includes one of the sadhana through which if done by a person can have a power to understand the personality of the person or to know anything about them like character, nature aur what thoughts are going on currently in that person’s mind. Sadhana like this are really very rare. Because with such sadhana what development and benefit one can generate in day to day life could be understand very simply. This sadhana holds a special place in rare sadhana which are meant for the development of the mind powers. I am sharing that charpatnath pranit dhoomavati prayoga.


Before starting this sadhana, sadhak should select their place for sadhana. There should be no one to sit on the aasan or the place of sadhana till the time sadhana days are going on. In this sadhana shadhak needs to do 11 rosary of mantra daily for one month (30 days). Rosary should be black hakeek. Cloth should be black. Time should be after 11 Pm in night. Establish dhoomavati yantra and picture infront of you. Lamp of the oil should keep on burning during sadhana time. Do viniyoga after yantra and picture poojan.

Viniyog: asy shri charapatbhanjan pranit dhoomavatee prayogasy purn viniyog abhisht siddhiyarthe karishyame purn siddhiyarthe viniyog namah

After this chant 11 rounds of the following mantra.

Om dhoomavatee kare na kaam, to ann haraam, jivan taro sukh sanvaaro, purati mam icchha, runi daas tamaaro om chhoo

After mantra chanting offer the chantings to the goddess dhoomavati.
It is not even more if we say that after completing this rare procedure a sadhak becomes invincible.

1 comment:

niraj yadav said...

I have not taken any kind of diksha than also can chant this mantra. Please suggest if yes than please grant me the permission.