समस्त पापों को भस्म करने का वेदोक्त मंत्र | Paap Dosh Nivaran Vedokt Mantra | Narayan Dutt Shrimali

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समस्त पापों को भस्म करने का वेदोक्त मंत्र | 

Paap Dosh Nivaran Vedokt Mantra | 

Narayan Dutt Shrimali


साधना के नियमों की अनिवार्य योग्यता: एक गहरा परिचय और मार्गदर्शन

आध्यात्मिक साधना एक गहन अनुशासन है, जो न केवल हमारे शरीर और मन को स्थिर करने की क्षमता मांगती है, बल्कि आत्म-नियंत्रण, एकाग्रता और पूर्ण श्रद्धा की भी आवश्यकता रखती है। जो इच्छुक साधक इस पथ पर अग्रसर होना चाहते हैं, उनके लिए साधना के नियमों और योग्यता का स्पष्ट ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। यहाँ हम ऐसे मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे, जो आपके साधनाकाल को प्रभावशाली और सफल बनाने में सहायक होंगे।

साधनाकाल में आवश्यक मुख्य योग्यताएँ

  • शारीरिक स्थिरता: कम से कम एक से डेढ़ घंटे तक एक स्थिर आसन में बिना हिले-डुले बैठना। इससे आपके शरीर का ध्यान व आंतरिक ऊर्जा संचरण ठीक होता है।

  • मानसिक एकाग्रता: साधनाकाल में मन को पूरी तरह केंद्रित रखना, बाहरी विचलनों से मुक्त रहना सीखना. इससे साधना की गहराई और प्रभाव बढ़ता है।

  • ब्रह्मचर्य का पालन: शारीरिक, वाचिक व मानसिक स्तर पब्रह्मचर्य की स्थिरता और संयम। यह साधना की ऊर्जा को संचित करने में मदद करता है।

  • सात्विक भाव और श्रद्धा: शुद्ध और सादगीपूर्ण भाव, आराध्य शक्ति तथा मार्गदर्शक गुरु के प्रति पूर्ण आस्था। यह श्रद्धा साधना की सफलता की आधारशिला है।

  • प्राण ऊर्जा और परमार्थ भावना: दैनिक साधना में उत्साह और उन्नत प्राणशक्ति की अनुभूति होना, तथा परोपकार और सार्वभौमिक भलाई के लिए समर्पण।

  • गुरु के निर्देशों का कड़ाई से पालन: गुरु द्वारा निर्धारित नियमों और व्यवहारिक अनिवार्यों का दृढ़ता से अनुसरण। यह सरल सच है कि एक मार्गदर्शक के निर्देके बिनाना साधना अधूरी रहती है।

साधना में आने वाले विघ्नों का निवारण: हनुमत यंत्र और मंत्र

साधनाकाल के दौरान यदि विघ्न या आकस्मिक संकट सामने आए, तो हनुमत यंत्र के साथ मंत्र जप करना अत्यंत प्रभावी उपाय हो सकता है। ‘हनुमत यंत्र’ को सामने स्थापित कर उसके बीच ‘मारुति मुंज फल’ रखें और वीर मुद्रा में आधे घंटे तक बिना माला के नीचे दिए गए मंत्र का जप करें:

॥ ॐ नमो हनुमते परकृत यंत्र मंत्र पराहंकार भूत प्रेत पिशाच पर दृष्टि सर्व विघ्न मार्जन हेतु विद्या सर्वोग्र भयान् निवारय निवारय वध वध लुण्ठ लुण्ठ पच पच विलुंच विलंच किलि किलि किलि सर्व कुयंत्राणि दुष्टवाचं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं फट् स्वाहा ।।

इस प्रक्रिया को एक सप्ताह लगातार करने से विघ्नों का समाधान होने लगता है। अंत में सामग्री को निबंधित मान्य मंदिर में समर्पित कर देना चाहिए।

आवेदनकर्ताओं के लिए सुझाव

  • स्वयं का मूल्यांकन करें: साधना के नियमों और योग्यताओं को समझकर अपनी वर्तमान स्थिति का निष्पक्ष परीक्षण .रें। इससे आपकी तैयारी का स्तर स्पष्ट होगा।

  • प्रतिदिन अभ्यास की दिनचर्या बनाएं: धीरे-धीरे एकाग्रता और स्थिरता बढ़ाने के लिए नियमित बैठने का अभ्यास करें। यह आपकी सहनशीलता बढ़ाएगा।

  • मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक तैयारी: सात्विक जीवअपनाकरपना कर मन और वचन को शुद्ध रखें। गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को समझें और उसके अनुसार व्यवहार करें।

  • समर्थन समूह खोजें: ऐसे साधक समूह या गुरु के संपर्क में रहें, जो आपका मार्गदर्शन कर सकें और प्रेरणा देते रहें।

  • सहनशीलता और धैर्य रखें: साधना की राह कभी-कभी कठिन होती है, परन्तु नियमों का पालन और निष्ठा आपको अवश्य सफलता दिलाएगी।

इस प्रकार, साधना के नियमों और आवश्यक योग्यताओं को समझना और उनका दृढ़ता से पालन करना किसी भी आवेदक के लिए एक संवेदनशील और उत्तरदायी कदम है। यह मार्ग सिर्फ आत्म-उन्नति का नहीं, अपितु संपूर्ण जीवन में पवित्रता और शक्ति का संचार भी करता है। अगर आप इस पवित्र साधना में स्वयं को समर्पित करने को तैयार हैं, तो ये बिंदु आपके लिए अमूल्य दिशा-निर्देश साबित होंगे।

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