Thursday, July 28, 2011

Mahavidya Rahasyam- Maa Tripur Bhairavi Rahasyam part -1

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दस महाविद्या तो अन्यतम हैं सभी साधक जो भी तंत्र क्षेत्र के जिज्ञासु हैं,साधक हैं , अध्येता सिद्ध हैं, वह तो मन में जीवन भर यही भावना रखते हैं की कभीतो कोई गुरु ऐसा उन्हें ऐसा मिलेगा जो इनमेंसे एक की साधना तोसिद्ध करा देगा , फिर जिस एक सिद्द हो गयी फिर दिव्य माँ के अन्य रूप की साधना क्या सफल न हो ही जाएगी .
जहाँ माँ भगवती छिन्नमस्ता के साधक तो कम हैं वही पर इन माँ त्रिपुर भैरवी के साधक तो मिला पाना सर्वथा असंभव हैं , इसलिए इन महाविद्या से सम्बंधित साहित्य भी मिल पाना भी बहुत कठिन हैं साधक इससे सम्बंधित तलाश में भटकते रहते हैं .पर कोई कोई सौभ्याग्य शाली हैंजो यह जानकारी प्राप्त कर पता हैं, माँ का स्वरुप बहुत ही अद्भुत हैं , उदित होने वाले सूर्य की भांति इनका स्वरुप होता हैं , जी भर भर के रक्त का पान कर कर के जिनका स्वरुप लाल हो गया हैं. यह महाशक्ति भैरव ही नही महाभैरव की शक्ति हैं , इनके भैरव का नाम दक्षिण मूर्ति भैरव हैं .

जो भी अघोर साधना , शमशान साधना , कापालिक साधना अर्थात शमशान से सम्बंधित साधना करना चाहते हैं ओर उसमें एक अद्भुत उच्च स्तर पाना चाहते हैं उन्हें तो दिव्य माँ के इस रूप में ध्यान रखना ही पड़ेगा , शमशान में निवासरत सभी द्वि आयामी वर्ग के शक्तियां फिर वह चाहे , भुत हो प्रेत हो या पिशाच या ब्रम्ह राक्षस ही क्यों न हो , माँ के इस रूप के साधक के सामने मानो भय भीत हिरण जैसे हैं ओर क्यों न ऐसा हो क्योंकि यह तो महा भैरव की शक्ति हैं जो हजारों गुना शक्ति शाली हैं ,इसी कारण जिन्हें भैरव साधना में एक उच्च स्तर की सफलता पाना हो वह भी इस ओर ध्यान रखे .
इसके लिए यह भी केबल न माने की यह मात्र शमशान की शक्तियों की अधिस्ठार्थी ही नहीं हैं बल्कि दिव्य माँ का यह स्वरुप अत्यंत ही आकर्षक हैं , तो "जैसा इष्ट वैसा साधक" के नियम के अनुसार साधक में वह अद्भुतता आकर्षण से संभंधित आ जाती हैं.वह साधक जहाँ भी जायेगा सभी के लिए आकर्षण का ही केंद्र होगा .
दस महाविद्या में एक यही साधना हैं जो महिला साधको द्वारा मासिक धर्म के दिनों में भी लगतार की जा सकती हैं
( अनेक वर्षों पूर्व की एक घटना जिस काल में सदगुरुदेव स्वयम भौतिक रूप से जब हमारे मध्य थे - एक गुरु बहिन ने अपने व्यक्तिगत जीवन में पति से उपेक्षित होकर सदगुरुदेव के एकशिष्य से गुरु धाम संपर्क किया तो उन्होंने उसे इस महाविद्या की साधना करने के लिए उन्हें सलाह दी , साथ ही साथ कुछ ऐसी प्रक्रिया भी थी की उन शिष्य को एक कमरे में दिगंबर अवस्था में आसन पर बैठकर जप करना था, उन गुरु बहिन को साधना के नियम आदि का नयी साधक होने के कारण अनेको नियम की कोई जानकारी भी नहीं थी इस कारण उन्होंने न कोई नियम ही पूंछे , नहीं इस सन्दर्भ मेंकोई उन्हें डर आदि लगा , जो की सामान्य रूप से साधको को लगता हैं की कहीं कुछ होगया तो .., साधना के दिन जब पुरे हुए तो उन्होंने उन शिष्य से संपर्क किया , अपने अनुभव बताये , उन्होंने कहा की साधना के दुसरे दिन से , उनके वह हर महीने के विशेष दिन प्रारंभ हो गए , कुछ संकोच वश उन्होंने इसके बारे मैंना पूंछ कर साधना चालू रखी जबकि सामान्यतः इस काल में साधना नहीं की जाती हैं , उन्होंने बताया की अर्ध रात्रि में एक स्त्री उनके सामने उस कमरे में न जाने कहाँ से आ गयी, ओर उसने अत्यंत प्रसन्नता पूर्वक आशीर्वाद दिया साथ ही साथ उस रक्त की मांग भीकी , उन गुरु बहिन ने जैसा उचित था वैसा ही किया हाँ अन्य कोई भी अनुभव नहीं हुए , जब उनसे यह पूंछा की ओर क्या अनुभव हुए , तो उन्होंने कहाँ की अब जब भी वह रास्ते में चलती हैं या किसी भी वाहन से यात्रा करती हैं तो लोग मुड मुड कर उन्हें देखते हैं ,जहाँ वह कार्य करती है अब ऑफिस में सभी उनके पास आ आ कर स्वयं भी बात करते हैं जबकि वह एक अत्यंत से ही सामान्य रूप रंग की महिला थी , अब पता नहीं क्यों अब उनके पति उनमें क्या देखा की वह भी पूर्वत स्नेह करने लगे . उन्होंने गद गद स्वरों में कहा की सदगुरुदेव ओर माँ के आशीर्वाद से उनका नष्ट सा हुआ जीवन पुनः सामान्य हो गया , यह सुनकर सदगुरुदेव जी के उन शिष्य ने कहा , सदगुरुदेव जीकी लीला भी अद्भुत हैं वह यह विशेष तथ्य इस महाविद्या के बारे में उस गुरु बहिन को बताना भूल गए थे की इस काल में केवल मात्र यही साधना की लगातार किजा सकती हैं . पर सदगुरुदेव भगवान् की विशेष कृपा थी जो वह इन अनुभव से विचलित हुए बिना यह साधना पूर्ण कर सकी . )
इससे यह भी एक बात सामने आती हैं की कोई भी देव वर्ग हमारे मन में जमे हुए पूर्वाग्रह के अनुसार नहीं आता हैं वह तो साधक किमानो भाव उसकी मानसिक अवस्था ओर उसके चिंतन को पढ़ता ही रहता हैं , पर सबसे महत्वपूर्ण तोयह हैं की के वह साधक यदि सदगुरुदेव जी का शिष्य हैं तो सदगुरुदेव जी से बिना अनुमति पाए वह साधना इष्ट साधक के सामने नहीं आएगा .
दूसरी बात यह हैं की जैसा की हमने बगलामुखी रहस्य के भाग ४ में बताया था की हम उस इस्ट की कौन से शक्तियों से सम्बंधित कौन सा ध्यान कर रहे हैं ,इस बात पर साधना के इष्ट का स्वरुप पूर्ण निर्भर करता हैं ओर वह किस प्रकार की शक्तियों का प्रभाव साधक के लिए प्रदान करेगा निर्भर करेगा .
क्रमशः
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Theses mahavidya sadhana are the ultimate sadhana in tantra world, any sadhak , Lerner , seeker and savants and even siddh always have desire that in their life they may meet some one(a guru) who will help him to get siddhita in any one of the mahavidya , and one who get siddhita in one mahavidya than how for the success stand far away for him for getting in success in other mahavidya sadhana. as you are very well aware of the facts that there are few sadhak of divine mother’s chhinnmasta form now a day seen, but here almost very less ,almost nil sadhak of this great mahavidya sadhana , and one of the reason is that very less literature available about this mahavidya , many sadhak are searching to get some insight of this mahavidya but very few can get success of getting that , divine mother this form is having ultimate beauty like thousand morning rising sun has her radiance , through blood drinking his form get red in color, she is not the shakti of bhairav but of mahabhairav. Her bhairav name is dakshina murti bhairav .
Those sadhak who has interest in Aghor sadhana, shamshan sadhana, Kapalik sadhana and want to achieve a highest level in that field , than he has to take interest in and have to understand this divine mother form. all the invisible two dimension’s elements either ghost ,vampire . vaitaal , brahm rakshas are just like a small creature in front of this divine mother form. And Why not that happens since she is the shakti of mahabhairav that has thousand times more strength .and this is the reason those who are interested in bhairav sadhana and also want to have a certain level must understand this divine mother form.
But do not consider that divine mother , this form concerned only to shamshan but this form has very attractive glow and appearance , as its has been saying that “as the isht deity so is the sadhak” so her sadhak where ever goes ,will always be centre of attention.
This is the only sadhana in tem mahavidya section that can be continued during the mc period of woman/female sadhak.
( some years ago when poojya Sadgurudev ji is in physical form present among us- one guru sister contacted in gurudham because of she was having some problem with her husband, one of the Sadgurudevji shishy adviced her to go for this sadhana and adviced such a process in that she has to sit in digamber state in a room of her home had to do the mantra jap on sitting aasan. As she was very new to sadhana field , she neither had any idea ,what were the rules that she had to follow strictly and nor she had any desire to ask, so she did not ask any more question and left home. and she started this sadhana without feeling any type of fear that this is mahavidya sadhana and as some of sadhak has fear that if something went wrong than.. she was unaware of that so she had no fear… when she successfully complete the sadhana and again meet that guru brother and tell her experience..
she said to him that on the second day of her sadhana her mc period was start, due to hesitation,she did ask to him and continued the sadhana normally sadhana has to stop in theses period , but on that day she knew not where a woman came/appeared to her room and very smiling blesses her and ask for that blood . whaty she could do rightly on the moment she did. And no other experience happened to her.
When she was asked was there any other experienced she felt. She replied now whenever she walks on the street or road everyone start looking her , even she travel from any other mode of communication , she was getting ultimate interest from others . even the office where she was working all her colleague now start talk to her and try to get opportunity to nearer to her. As she completely aware of that she is a very normal and ordinary woman .even what now her husband seen in her ,he again start taking interest in her and start loving as he was previously did.
She spoke with full heart now due to sadgurudev ji grace and mother blessing her lost family /world again she was able regained. On listening this that shishy very much amazed that and told her , it’s the Sadgurudev divine lila that he had forgot to mentioned this fact to her but due to Sadgurudev blessing she did not stop the sadhana, this is the only sadhana that can be continued in this special time period in woman life.)
This clearly shows us that no dev or devi is tied to us as per our so called belief and faith and vision . she/he also reading our mind and thought continuously and most importantly if any sadhak is sadgurudevji’ shishy than its sure without taking Sadgurudev jis permission no dev or devi will appear in front of sadhak her.
Second most important things is that as we have mentioned in ma Balgamukhi rahasyam part 4 that what dhyan we are using and that dhyan mentioning which aspect or power of that dev/devi only that will be felt of us. so one must keep more concentration of theses facts .
In continuous..
****NPRU****

Guru Mantra se samadhi ki aur

गुरुमंत्र से समाधी की और -- २ आज इस लेख आप को योग सरीर के वारे बताउगा आशा है के आपकी जानकारी में जरुर विस्तार होगा !इस सरीर की रचना अपने में अनेक रहस्य संजोये हुए है !सभी मानते है के सरीर में ७ चक्र मूलाधार से लेकर सहस्र चक्र तक है और इस आगे साधक की सोच बहुत कम है !लेकिन निखिल योग के तहत मैं जो रहस्य उद्घाटन करने जा रहा हू वोह आपको जरुर हरेन कर देगा ! १. इस सरीर में १०८ श्री चक्र है जीने भेदन करके साधक सिद्ध पुरषों की श्रेणी में आ जाता है और उसे ब्रमंड के किसी कोने में जाना और उस की जानकारी सहज ही हो जाती है !निखिल योग बहुत ही विशाल है !जिसे अपना कर सिदाश्र्म के जोगी एक विशेष उन्ती में य़ा गये और बर्षो की तपश्या को कुश ही दिनों में साकार कर मनोवषित स्थिति प्राप्त कर सके आप भी उस आनंद को पा सके ऐसी कामना करता हुआ इस लेख को शुरू करता हू !इस सरीर में ६ कुंडलिनी शक्ति ६ जगह सुप्त अवस्था में विराज मान है जिसे सभी धर्म आचार्यो ने गुप्त ही रखा है सरीर में ६ जगह मूलाधार चक्र है !और उसी लड़ी में आगे ६ चक्र कारवार है जिन के नाम आप जानते हैं !पहली अवस्था पैर से शुरू करते है दाये और बाये पैर के अंगूठे में मूलाधार चक्र विदमान है और उसके थोरा नीचे शेषनाग का तिर्कोंन है जिस में कुंडलिनी शक्ति विदमान है वडी उंगल के ठीक नीचे स्वाधिष्ठान चक्र है !और अनमिका के नीचे मणिपुर चक्र और कनिष्ठा के नीचे अनहद चक्र इस से थोरा नीचे उसी चक्र के नीचे विशुद चक्र और हथली और विशुद चक्र के मद्य में आज्ञा चक्र और हथेली के मद्य भाग में सहस्र्हार चक्र है मूलाधार में सिदेश्वर गणपति का वास है !इस के जागरण से जा यह कहू की इस कुंडलिनी के जागरण से सभी देव शक्तिया गुरु के दाहिने अगुठे में वास करती है और शास्र्हार के जागरण से पदम योग बनता है और गुरु के चरणों में गंगा का वास होता है और जो साधक इस शक्ति जा तत्व से एकाकार कर लेता है!वोह जहाँ भी कदम रखता है वोह स्थान पवित्र हो जाता है देव दर्शन उसे सहज ही सुलभ हो जाता है ! २. अब दुसरे बाये पैर में भी इसी परकार ७ चक्र और कुंडलिनी शक्ति विदमान है !इस मूलाधार में विक्तेश्वर गणपति का वास है और इस के जागरण से असीरी शक्तिया जागरण होती है और वोह शमशान अदि साधनायो में सहज ही सफलता पा लेता है भूत अदि गण उसके आगे हाथ जोड़े खड़े रहते है और उसके हुकम को मानते है वेह अपने बाय पैर के अगुठे से एक विकट पाप शक्ति को जन्म दे सकता है जा यह कहू भूत को पैर के अगुठे से ही पैदा कर सकता है पूर्ण शास्र्हार के भेदन से सभी विकट शक्तियों पे आदिकार स्थापन करने में कामजाब हो जाता है उसके के लिए किसी भी आत्मा पे आदिकार पाना मुश्किल नहीं होता वह हर जगह निर्भीक रहता है

Wednesday, July 27, 2011

GURU SEVA - Jis Ke aage sari sadhnaye kucch bhi nahi hai



गुरु सेवा : जिसके सामने सारी साधनायें न्यून हैं.

http://www.facebook.com/pages/Mantra-Tantra-Yantra-Science/114316648623465



गुरु सेवा : जिसके सामने सारी साधनायें न्यून हैं.

"मुझे वे शिष्य अत्यंत प्रिय हैं, जो अपने स्तर के अनुसार सेवा कार्य में

रत हैं और समाज के नवनिर्माण में अपना योगदान प्रस्तुत कर रहे हैं. जब

मैं एक, पॉँच, दस, पचास, सौ, पॉँच सौ व्यक्तियों व् परिवारों में

अध्यात्मिक चेतना की लहर फैलाकर, उन्हें पत्रिका सदस्य बनाकर आर्य

संस्कृति से उनका पुनर्परिचय करने वाले शिष्यों के नामों को पड़ता हूँ,

तो उन पर मुझे गर्व हो आता हैं, ऐसा लगता हैं, कि मेरा एक प्रयास कुछ

सार्थक हुआ हैं और मानव कल्याण को समर्पित कुछ रत्नों का चुनाव हो पाया

हैं. ऐसे गृहस्थ शिष्य मुझे सन्यासी शिष्यों से अधिक प्रिय हैं, क्योंकि

सन्यासी शिष्यों द्वारा कि गयी सेवा से सिर्फ उनका ही कल्याण होता हैं,

जबकि इन गृहस्थ शिष्यों द्वारा कि जाने वाली सेवा से पुरे समाज का भी

कल्याण होता हैं. ऐसे शिष्यों के नाम स्वत: ही मेरे ह्रदय पटल पर अंकित

हो जाते हैं और मैं अपनी करुणा और आशीर्वाद की अमृत वर्षा से उन्हें



सराबोर कर देने के लिए व्यग्र हो उठता हूँ."

-परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंदजी महाराज

Monday, July 18, 2011

Shiva Tandava Strotram


‎||सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ||

||श्रीगणेशाय नमः ||

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
matted hair-thick as forest-water-flow-consecrated-​area
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् |
in the throat-stuck-hanging-snake-lof​ty-garland
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वय​ं
damat-damat-damat-damat-having​ sound-drum-this
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||
did-fierce-Tandava-may he shower-on us-Shiva-auspiciousness

With his neck, consecrated by the flow of water flowing from the
thick forest-like locks of hair, and on the neck, where the lofty snake
is hanging garland, and the Damaru drum making the sound of
Damat Damat Damat Damat, Lord Shiva did the auspicious dance of
Tandava and may He shower prosperity on us all.

जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्​झरी-
matted hair-a well-agitation-moving-celestia​l river
- विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि​ |
agitating-waves-rows-glorified​-head
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावक​े
Dhagat dhagat dhagat-flaming-forehead-flat area-fire
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२||
baby-moon-crest jewel-love-every moment-for me

I have a very deep interest in Lord Shiva, whose head is glorified by
the rows of moving waves of the celestial river Ganga, agitating in
the deep well of his hair-locks, and who has the brilliant fire flaming
on the surface of his forehead, and who has the crescent moon as a
jewel on his head.

धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्​धुर
King of mountains-daughter-sportive-ki​th-beautiful-
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमा​नसे |
glorious-horizon-all living beings-rejoicing-mind
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धराप​दि
compassion-look-continuous flow-obstructed-hardships
क्वचिद्दिगम्बरे( क्वचिच्चिदंबरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||३||
some time-in the omnipresent-mind-pleasure-may seek-in a thing

May my mind seek happiness in the Lord Shiva, in whose mind all the
living beings of the glorious universe exist, who is the sportive
companion of Parvati (daughter of the mountain king), who controls
invincible hardships with the flow of his compassionate look, who is
all-persuasive (the directions are his clothes).

लताभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्​रभा
creeping-snake-reddish brown-shining-hood-gem-luster-​
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वध​ूमुखे |
variegated-red dye-melting-applied-directions​-beloved-face
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरी​यमेदुरे
intoxicated-elephant-glitterin​g-skin-upper garment-covered
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||४||
mind-pleasure-wonderful-may it seek-in him who supports all life

May I seek wonderful pleasure in Lord Shiva, who is supporter
of all life, who with his creeping snake with reddish brown hood and
with the luster of his gem on it spreading out variegated colors on the
beautiful faces of the maidens of directions, who is covered with a
glittering upper garment made of the skin of a huge intoxicated
elephant.

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
Indra/Vishnu-and others-all-lined up-heads-
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः |
flower-dust-force-grayed-feet-​seat
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक
snake-red-garland (with) tied-locked hair
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ||५||
for the prosperity-for a long time-may he be-Cakora bird-relative-on head

May Lord Shiva give us prosperity, who has the moon (relative of the
Cakora bird) as his head-jewel, whose hair is tied by the red snake-
garland, whose foot-stool is grayed by the flow of dust from the
flowers from the rows of heads of all the Gods, Indra/Vishnu and others.

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्ग​भा-
forehead-flat area-flaming-fire-sparks-luste​r
- निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् |
devoured-God of Love-bowing-Gods-leader
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
cool-rayed-crescent-beautiful-​head
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ||६||
for the Siddhi-prosperity-head-locked hair-may it be-to us

May we get the wealth of Siddhis from Shiva's locks of hair, which
devoured the God of Love with the sparks of the fire flaming in His
forehead, who is bowed by all the celestial leaders, who is beautiful
with a crescent moon

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल​-
dreadful-forehead-flat area-dhagat-dhagat-flaming
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसाय​के |
fire-offered-powerful-God of Love
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्र​पत्रक-
king of mountains-daughter-breast-tip-​colorful-decorative lines
- प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम |||७||
drawing-sole-artist - in the three-eyed -deep interest-mine

My interest is in Lord Shiva, who has three eyes, who has offered the
powerful God of Love into the fire, flaming Dhagad Dhagad on the
flat surface of his forehead who is the sole expert artist of drawing
decorative lines on the tips of breasts of Parvati, the daughter of
the mountain king.

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्-
new-cloud-circle - obstructed-harsh-striking-
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः |
new moon-midnight-darkness-tightly​-tied-neck
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
celestial-river-wearing-may he bless-skin-red
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ||८||
moon-lovely-prosperity-univers​e-bearer of the burden

May Lord Shiva give us prosperity, who bears the burden of this
universe, who is lovely with the moon, who is red wearing the skin,
who has the celestial river Ganga, whose neck is dark as midnight
of new moon night covered by many layers of clouds.

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्​रभा-
well-opened-blue-lotus-univers​e-darkness-luster
- वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्​धरम् |
hanging-inside-temple-luster-t​ied-neck
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
Manmatha-killer-city-destroyer​-mundane life -destroyer-sacrifice destroyer
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ||९||
elephant-killer-demon-killer-h​im-destroyer of Lord Yama-I worship

I pray to Lord Shiva, whose neck is tied with the luster of the temples
hanging on the neck with the glory of the fully-bloomed blue lotuses
which looked like the blackness (sins) of the universe, who is the
killer of Manmatha, who destroyed Tripuras, who destroyed the
bonds of worldly life, who destroyed the sacrifice, who destroyed the
demon Andhaka, the destroyer of the elephants, and who controlled
the God of death, Yama.

अखर्व( अगर्व) सर्वमङ्गलाकलाकदंबमञ्जरी
great-all-auspicious-art-varie​gated-bunch-
रसप्रवाहमाधुरी विजृंभणामधुव्रतम् |
enjoyment-flow-sweetness-flari​ng up-bees
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
Manmatha-destroyer-city-destro​yer-worldly bond-destroyer -sacrifice-destroyer
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ||१०||
elephant-killer-Andhaka-demon-​killer-him-Yama-controller-I worship

I pray to Lord Shiva, who has bees flying all over because of the sweet
honey from the beautiful bunch of auspicious Kadamba flowers, who
is the killer of Manmatha, who destroyed Tripuras, who destroyed the
bonds of worldly life, who destroyed the sacrifice, who destroyed the
demon Andhaka, the killer of the elephants, and who controlled the
God of death, Yama.

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्​वस-
victorious-foot-sky-whirling-r​oaming-snake-breath-
- द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभाल​हव्यवाट् |
coming out-shaking-evident-dreadful-f​orehead-fire
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतु​ङ्गमङ्गल
Dhimid-dhimid-dhimid-sounding-​drum-high-auspicious-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||
sound-series-caused-fierce-Tan​dava dance-Shiva

Lord Shiva, whose dance of Tandava is in tune with the series of loud
sounds of drum making Dhimid Dhimid sounds, who has the fire
on the great forehead, the fire that is spreading out because of the
breath of the snake wandering in whirling motion in the glorious sky.

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौ​क्तिकस्रजोर्-
touching-varied-ways-snake-emb​odied-garland
- गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
most precious-gems-brilliance-frien​ds-enemies-two wings
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
grass-lotus-eyes people and the great emperor
समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||१२||
equal-behaviour-always-Lord Shiva-worship-I

When will I worship Lord Sadasiva (eternally auspicious) God, with
equal vision towards the people and an emperor, and a blade of grass
and lotus-like eye, towards both friends and enemies, towards the
valuable gem and some lump of dirt, towards a snake and a garland
and towards varied ways of the world

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
when-celestial river-bush-hollow place(in)-living
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
released-bad mind-always-on the head-folded hands-
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
agitation-shaking-eyes-the best-forehead-interested
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३||
"Shiva" -mantra-uttering-when-happy-wi​ll-be-I

When will I be happy, living in the hollow place near the celestial
river, Ganga, carrying the folded hands on my head all the time, with
my bad thinking washed away, and uttering the mantra of Lord Shiva
and devoted in the God with glorious forehead with vibrating eyes.

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
This-indeed-daily-thus-said-th​e best of the best-stotra
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
reading-remembering-saying-a person-sanctity-gets-always
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
in Shiva-in Guru-deep devotion-quickly-gets-no-other​-way
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||
removal of delusion-indeed-for the people-blessed Shiva's thought

Whoever reads, remembers and says this best stotra as it is said here,
gets purified for ever, and obtains devotion in the great Guru Shiva.
For this devotion, there is no other way. Just the mere thought of
Lord Shiva indeed removes the delusion.

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
worship-end-time-Ravana-sung
यः शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे |
who-Shiva-worship-dedicated-re​ads-early in the evening, after sunset
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
to him-stable-chariot-elephant-ho​rse-having
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||
Lakshmi-always-definitely-favo​urable-gives-Shiva

In the evening, after sunset, at the end of Puja, whoever utters this
stotra dedicated to the worship of Shiva, Lord Shiva blessed him with very
stable Lakshmi (prosperity) with all the richness of chariots, elephants
and horses.

इति श्रीरावण- कृतम्
thus sri-Ravana-done
शिव- ताण्डव- स्तोत्रम्
Shiva-tandava-stotra
सम्पूर्णम्
ends.

Mahakali Mahavidya By Dr. Narayan Dutta Shrimali

Mahakali is the first Mahavidya. It is the best sadhana to make one's
life complete. Realization of mother Mahakali, success in all
sadhanas, all the siddhis, immortality, perfect health, unlimited
wealth, elimination of all problems, eradication of all enemies etc.
are just a few of the things which a sadhak can gain from this
sadhana.
ø¤º°`°º¤ø,,,,ø¤º°`°º¤ø,,,,ø¤º°`°º¤ø,,,,ø¤º°`°º¤ø

Mantra from MTYV Jan '95

Om Kreem Kreem Guhya Kalyei Kreem Kreem Phat

MTYV Jan '96

Om Kreem Kreem Mahakalyei Kreem Kreem Namah

Bhadrakali Mantra from MTYV Mar '96

Om Bham Bhadraayei Namah Aagachchha Bham Om

Mantra from MTYV Apr '97

Om Kreem Kreem Kreem Hleem Hreem Kham Sphotay Kreem Kreem Kreem Phat

Mantra from MTYV Jan '98

Om Kreem Kleem Mahakali Hum Hum Phat

Kamakhya Mantra from MTYV Aug '00

Treem Treem Hoom Hoom Streem Streem Kaamaakhye Praseed Streem Streem
Hoom Hoom Treem Treem Treem Swaha

Saumya Dakshin Kali Mantra from MTYV Nov '00

Om Kreem Kreem Kleem Kleem Saumya Dakshin Kaalike Kleem Kleem Kreem
Kreem Phat

Kundalini Awakening

Kundalini Awakening

कुंडलिनी जागरण
कुन्डलिनी Kundalini जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है.
कुन्डलिनी जागरण साधना गुरु के सानिध्य मे करनी चाहिये.
यह शक्ति अत्यन्त प्रचन्ड होती है.
इसका नियन्त्रण केवल गुरु ही कर सकते हैं
यदि आप गुरु दीक्षा ले चुके हैं तो अपने गुरु की अनुमति से ही यह साधना करें.
यदि आपने गुरु दीक्षा नही ली है तो किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेकर ही इस साधना में प्रवृत्त हों.
|| ॐ ह्रीं मम प्राण देह रोम प्रतिरोम चैतन्य जाग्रय ह्रीं ॐ नम: ||
यह एक अद्भुत मंत्र है.
इससे धीरे धीरे शरीर की आतंरिक शक्तियों का जागरण होता है और कालांतर में कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होने लगती है.
प्रतिदिन इसका १०८, १००८ की संख्या में जाप करें.
जाप करते समय महसूस करें कि मंत्र आपके अन्दर गूंज रहा है.Kundalini Awakening
मन्त्र जाप के अन्त में कहें
३ बार ---> ॥ ऊं श्री निखिलेश्वरायै नमः ॥
ना गुरोरधिकम,ना गुरोरधिकम,ना गुरोरधिकम
शिव शासनतः,शिव शासनतः,शिव शासनत
निखिलेश्वरानंद मंत्रम :-
॥ निं निखिलेश्वराय नमः ॥
शास्त्र कहता है कि
य: गुरु स: शिव: = जो गुरु हैं वही शिव हैं
विधान :-
1.तीन लाख जप ९० दिनों में पूरा करें.
2.अद्भुत अनुभव होंगे.

shiv panchakeshar stotra maha mantra

नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय भस्माङगरागाय महेश्र्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः
शिवायमन्दाकिनिसलिल चन्द्नचर्चिताय नन्दीश्र्वर प्रमथनाथ महेश्र्वराय
मंदार पुष्पबहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वर नाशाकाय
श्री नीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय
वसिष्ठकुम्भोद्भव गौतामार्य मुनीन्द्र देवार्चित शेखराय
चंद्रार्कावैश्वानर लोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय
पंचाक्षर मिंद पुण्यं यः पठेच्छीव् सन्नदै l
शिवलोक कमवाप्नोति शिवेन सहमोदते l l
l l इति श्री शिव पंचाक्षर स्त्रोत्रम l l